लाल किताब
केतु खाना नंबर 5
अपनी रोटी के टुकड़े के लिए गुरु का निगरान
हुए नेक थे जब जवानी के चढ़ते |
मिले पोते इतने न थे जितने लड़के |
नेक हालत में
1) उठती जवानी के समय नेक होवे तो पोतो की संख्या अपने लड़को से अधिक होगी | केतु का फल अपने लिए उत्तम होगा | लड़को की हालत, आयु गुरु पर होगी | 24 साल की आयु तक रोटी के लिए गुरु का निगरान होगा | बाद में स्वयं उत्तम होगा और गुरु की शर्त न होगी या हट जाएगी |
2) गुरु, सूर्य या चंद्र 4-6-12 में हो तो नर संतान पांच से कम न होगी |
3) जब शनि नंबर 9, शुक्र नंबर 4 में हो तो पूरी मच्छ रेखा (माली) कायम होगी | अब शनि संतान के सम्बन्ध में कोई मंदा प्रभाव न देगा | न ही दो स्त्रियों का झगड़ा होगा यानि शुक्र नंबर 4 की दो स्त्रियों की शर्त न होगी | संतान की सँख्या एक ही स्त्री से 9 लड़के और 3 लड़कियां होंगी |
मंदी हालत में
1) जब गुरु मंदा हो तो टेवे वाला स्वयं तो बहुत सुंदर था मगर पता नहीं वो सुंदरता जवानी में कहाँ गयी | संतान के लिए मंदा और लड़को को साँस (दमा) की बीमारी और 45 साल तक केतु का मंदा हाल होगा | बेशक लड़के कितने भी पैदा हुए हो मगर जीवित शायद ही होगा | घर में कुत्ते के रोने की आवाज आए |
2) जब टेवे में पितृ ऋण हो तो केतु का गृहस्थी प्रभाव मंदा ही होगा | चाहे केवल दो ही लड़के जीवित हो मगर वो पूरी तरह से सुखिया और सुख देने वाले होंगे |
3) चंद्र या मंगल 3-4 में हो तो केतु का प्रभाव मंदा होगा | टेवे वाला गरीब होगा | उसके पशु बीमार होंगे | मंदी हालत होगी | चंद्र / मंगल की चीजों का दान उत्तम होगा | जैसा धर्म ईमान, वैसी ही संतान की हालत होगी |
4) शनि 5-9 में हो तो तीन लड़के नष्ट होने पर 36 साला आयु तक फिर तीन अवश्य कायम होंगे खासकर जब च्नद्र / मंगल भी 3-4 में हो |
S Kuber RA
Jyotish Acharaya
Vedic & Lal Kitab Astrologer
Lal Kitab Vastu Consultant