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Monday, 5 November 2018

लाल किताब केतु खाना नंबर 12

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 12 

ऐशो आराम, जद्दी विरासत

भरे जर कबीला चाहे बच्चो से तेरा |
ऐवज घर गुरु का तू किस जन्म देगा |

नेक हालत में

1) तरक्की की शर्त है तबदीली की नहीं |

2) केतु जब नंबर 12 का फल जाहिर न करे तो नंबर 2 ससुराल में या नंबर 2 का फल देगा | निशानी नंबर 2 के सम्बंधित चीजों से होगी और गुरु के ग्रह की तबियत होगी | आदमी के यहाँ संतान के जन्म दिन से या संतान की 24 साला आयु से इज्जत तथा धन खूब जमा होंगे | ऐशो आराम तथा धन होगा |

3) शनि, शुक्र, गुरु और केतु चारो का फल उत्तम मगर मंगल यानि बड़ा भाई, ताया और मामा की सहायता न होगी | सिर्फ लड़का ही तारेगा | तरक्की की शर्त होगी | मकान, सफर का फल उत्तम होगा |

4) भरने लगे तो एक झोले में ही कबीला भर दे | नर संतान 6 से 12 जो सेहत और दौलत में उत्तम हो चाहे 12 में दुश्मन ग्रह साथ हो बशर्ते केतु सेवा या केतु कायम रखे | 

5) मंगल और राहु हसद (ईर्ष्या) करेंगे यानि उनसे सम्बंधित चीजे, रिश्तेदार मदद न करेंगे | मगर केतु से सम्बंधित चीजे, रिश्तेदार (लड़का) हर तरह से बरकत देंगे |

6) खाना नंबर 6 खाली हो तो दौलतमंद परिवार का मालिक, जद्दी विरासत कुदरती हक होगा | केतु का फल उच्च होगा | गृहस्थी सुख में हर तरफ बरकत होगी | खुद अपना आप, अल-औलाद, रिश्तेदार सभी गुलजार में शानो शौकत जब तक ऐश पसंदी कायम रखे | 

मंदी हालत में

1) टेवे वाले पर मंदा असर न होगा |

2) औलाद नरीना शक्की, केतु बर्बाद |

3) खाना नंबर 6 में जब राहु के साथ उसके दुश्मन ग्रह हो तो औलाद बर्बाद या नदारद होगी |

मंगल हो तो 28 साल उम्र तक औलाद नदारद
चंद्र हो तो 32 साल तक
सूर्य हो तो 42 साल तक
शुक्र हो तो 25 साल तक औलाद नदारद |

मगर ऐश पसंद तबियत हो तो औलाद की बरकत होगी और केतु मंदा न होगा | ऐसा आदमी मंगल बद के इंसान से मिलता जुलता होगा |

अगर राहु के साथ बुध हो जो केतु का शत्रु है तो भी केतु मंदा न होगा |   

4) जब नंबर 6 में राहु के साथ दुश्मन ग्रह हो या नंबर 2 में उनके दुश्मन ग्रह हो या नंबर 2 में चंद्र हो और केतु का असर दूसरे ग्रहों की वजह से नेक हो तो केवल 2 लड़के होंगे |

5) किसी लावल्द इंसान से मकान या जमीन खरीदे तो टेवे वाला भी लावल्दी से दूर न होगा |

6) जब चंद्र नंबर 2 में हो तो दोनों में से केवल एक का असर अच्छा होगा | चंद्र नंबर 2 भी देखे |

7) टेवे वाला अगर कुत्तो को सताए तो केतु मंदा फल देगा | औलाद की मंदी हालत होने पर राहु का उपाय सहायक होगा | अगर माली कष्ट हो तो दूध में अंगूठा डाल कर चूसना मुबारिक होगा |

8) स्त्री के टेवे में स्वयं केतु का प्यार या सम्बन्ध सहायक होगा | औलाद के विघ्न को कुत्ता बर्दाश्त करेगा यानि कुत्ते पर कुत्ता मरेगा | 11 कुत्ते तक मर सकते है मगर संतान जीवित रहेगी | एक कुत्ता मरने के बाद 40-43 दिन के अंदर-अंदर दूसरा कुत्ता पाल ले |  पूरा काला कुत्ता पालना जायदा शुभ होगा | काला-सफ़ेद दो रंगा भी नेक होगा |

 S Kuber RA
Vedic & Lal Kitab Astrologer
Lal Kitab Vastu Consultant 

लाल किताब केतु खाना नंबर 11

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 11 



गीदड़ स्वभाव वाला कुत्ता

फ़िक्र छोड़ गुजरे का जो चली गयी है |
नजर रख तू आगे की जो आ रही है |

केतु 11* ग्यारह गुना हो, धन-दौलत हो उम्दा |
पर खुद केतु** शनि दोनों का, फल होगा ही मंदा |
जायदाद न उतनी होगी, जितनी खुद बनाए |
बुध अगर न तीजे बैठे, केतु राज कराए |
गर बुध उसके तीजे होव, केतु मारे चीख़ाँ |
किस्मत की दोरंगी होव, रोवे अपना लेखाँ |

*मर्द के टेवे में अपना लड़का
**औरत के टेवे में लड़का और दोहता

केतु, गुरु 5-11 होते, जन्म लड़का जब लेता हो, जिस्म उम्र उस मुर्दा गिनते, लाश अमूमन पैदा हो  

नेक हालत में

1) जो गुजर गई वो अच्छी होगी | सदा आगे का ख्याल रखना होगा | जद्दी जायदाद तो इतनी न होगी जितनी स्वयं पैदा की होगी | केतु राजदरबार के लिए राजयोग जब तक नंबर 3 में बुध न हो हरदम एक अकेला 2-11 की तरह बहता होगा |

2) गुरु का आसन | गीदड़ स्वभाव कुत्ता | स्वयं केतु की शक्ति, कामदेवी |

3) शनि नम्बर 3 में हो तो 11 गुना नेक माली हालत होगी | 11-23-36-48 साल में नंबर 1 में आएगा और उम्दा प्रभाव होगा जब नर ग्रह / स्त्री ग्रह मंदे हो |

4) खाना नंबर 3 में बुध न हो तो राजदरबार के लिए राजयोग होगा |

मंदी हालत में

1) अपने लड़के के जन्म पर (औरत के टेवे में लड़का और दोहता) अमूमन माता न होगी | केतु की आयु तक का फल, अपनी माता की नजर बल्कि उसकी आयु और माता और अपनी संतान का आपसी गुजरान, चंद्र की जानदार और बहने वाली चीजे सभी ही पर मंदा असर लेंगे | मगर संतान स्वयं नेक होगी |

2) स्वयं दरिद्री मगर संतान नेक जब नंबर 5 का राहु किसी प्रकार सहायक हो | मगर स्त्री के टेवे में उल्ट होगा यानि केतु का असर मुबारिक ही होगा |

3) शुभ काम के समय पीछे से दी हुए आवाज मंदे असर की निशानी होगी |

4) बुध नंबर 3 में हो तो चंद्र का फल खासकर 5-11-23 36-48 साल आयु में मंदा या सिफर ही होगा |

5) शनि मंदा हो तो मकान, संतान दोनों की उन्नति न होगी | मगर स्त्री के टेवे में शनि मंदा होने पर भी केतु मंदा न होगा |

6) नर संतान मुर्दा पैदा होगी | शनि के सफ़ेद चीजे खासकर मूली रात को स्त्री के सिरहाने रखकर सवेरे धर्म स्थान में देना सहायक होगा | स्त्री बचेगी | दूसरे साल फिर दोबारा नर संतान पैदा होगी | पहली संतान शायद ही जीवित हो |

7)   जब केतु खाना नंबर 11 में और गुरु 5 में हो तो धर्म के नाम पर मांग कर खाना या दान लेना उसे निसंतान करेगा ओर बिना कफ़न मरने की पहली निशानी होगी | बच्चे मुर्दा ही पैदा होंगे

S Kuber RA
Vedic & Lal Kitab Astrologer
Lal Kitab Vastu Consultant 

लाल किताब केतु खाना नंबर 10

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 10 


चुपचाप अपने रास्ते चलने वाला मौकेबाज (मंदी हाल) मौका शनास (पहचानने या परखने वाला) (नेक हालत)  

उजाड़े बरादर (भाई) मुआफी जो देता |
भरे पेट दौलत न कंगाल होता |

नेक हालत में

1) जिस कदर भाई उजाड़े, वह माफ़ी देता जाए वह और भी बढ़ता जाएगा | कंगाल न होगा |

2) शक्की हालत का होगा | फैसला शनि पर होगा | मगर मालोदौलत पर कभी मंदा न होगा | अगर मंदा हो तो सिर्फ संतान पर बुरा प्रभाव देगा |

3) चुपचाप अपने रास्ते पर चलने वाला कुत्ता |

4) धनी होगा | अगर बुरे चरित्र वाला हो तो खूबसूरत स्त्री मंदे कफ़न का सबूत देगी |

 5) शनि उत्तम या उत्तम घरो में हो तो मिटटी से सोना मिले | 24 साल आयु में लड़के ही लड़के हो | गुरु का फल उत्तम होगा |

6) शनि नंबर 6 में हो तो नामी खिलाडी होगा खेल चाहे कोई भी हो | जिसमे चाल-चलन की नेक और बद खेले भी शामिल होंगी |

मंदी हालत में

1) मंदी हालत में केतु से सम्बंधित जानदार चीजो पर 24, 48 साल उम्र तक मंदा असर देगा जब शनि मंदा हो |

2) शनि मंदा या मंदे घरो में हो तो औलाद की बर्बादी के समय, बल्कि पाप की उम्र, राहु 42, केतु 48 और दोनों की मुश्तरका 45, से पहले ही चाँदी का बर्तन (कटोरा वगैरा) शहद से भर कर रख दे और बाहर वीराने में दबा दे | 48 साल के बाद कुत्ता रखना जरूरी होगा जो सहायक होगा | 45/48 साल आयु तक / में चाल-चलन को संभालना संतान के जीवन की नींव होगा | केतु नंबर 8 वाला उपाय यानि काला-सफ़ेद कम्बल मंदिर में दान करना शुभ होगा | अकेला केतु मंदा हो तो मंगल सहायक होगा | लेकिन जब मंगल भी नंबर 10 में हो तो नंबर 3 और दोनों का फल मंदा होगा | ऐयाश जनाही होगा | गृहस्थी काम में मंदा होगा | सोने को मिटटी खा जाए, हर तरफ बर्बादी होगी | अब चंद्र का उपाय करे यानि मकान की नींव में दूध दबा दे या शहद या दोनों दबा दे |

3) शनि नंबर 4 में हो तो तीन नर संतान नष्ट होंगी मगर धन के लिए मंदा न होगा | केतु नंबर 8 का उपाय करे |    

S Kuber RA
Jyotish Acharaya
Vedic & Lal Kitab Astrologer

Lal Kitab Vastu Consultant

लाल किताब केतु खाना नंबर 9

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 9 


इंसान की जुबान समझने कुत्ता | बाप का हुक्म मानने वाला बेटा |
 
माता-पिता अहसान हम पर जो करते |
आयु गुजरे सारी ऐवज उनको भरते |

केतु कायम स्वयं पिता को, तारता नहीं वो मामा को |



नेक हालत में

1) तरक्की की शर्त है, तबदीली की नहीं | दस्ती मेहनत से धन कमाएगा | कुत्ते की वफ़ादारी और सुअर की बहादुरी, हर दो सिफ़्त का मालिक होगा | ये सिफ्ते उसकी औलाद में जरूर होंगी | केतु की जाति अच्छी या बुरी हालत का फैसला गुरु की हालत पर होगा |

2) दस्ती मेहनत के कारोबार (हुनरमंदी वगैरा) से अमीर होगा | केतु पालन, या संसार के तीन कुत्तो का पालन करने से बढ़ेगा |

3) शुक्र, शनि और गुरु का उम्दा फल और नंबर 2 का हर एक ग्रह चाहे शत्रु चंद्र ही क्यों न हो, उत्तम फल देगा |

4) खाना नंबर 7 के ग्रह की आयु गुजरने के बाद केतु का प्रभाव और भी उत्तम हो जाएगा | नामर्दो को मर्द बनाना और लावल्दो को औलाद देने के सम्बन्ध में ऐसे व्यक्ति का आशीर्वाद ईश्वर के आशीर्वाद से कम न होगा | घर में गुरु के चीजों को कायम रखना बहुत ही नेक होगा जैसे सोने की चौकोर ईंट, केसर वगैरा | शरीर पर सोना डालना, कानो में सोना डालना बहुत उत्तम | ऐसा करने से केतु से सम्बंधित चीजों का प्रभाव नेक होगा जैसे रीढ़ की हड्डी, कान, जोड़, पाँव, घुटने वगैरा |

5) घर में रखे सोने के बराबर सोना बढ़ता जाएगा इसलिए घर में सोना खरीद कर जरूर लाए | अपने बड़ो जैसे पिता आदि से मिला हुआ सोना बहुत नेक फल का होगा | अच्छा यही होगा की सोना न बेचे क्योंकि घर में रखे सोने के बराबर सोना बढ़ता ही जाएगा | अपनी संतान, आने वाले अगले साल का हाल कैसा होगा, बताने वाली होगी यानि टेवे वाले को अपने पुत्र की सलाह बहुत काम आने वाली होगी | टेवे वाले को नेक सलाह देने वाले जरूर मौजूद होंगे | परदेस में अधिक रहेगा |  आदमी की बोली समझने वाला कुत्ता | बेटा अपने बाप (टेवे वाले का) का हुक्म मानने वाला होगा | माता-पिता का एहसान सारी उम्र न भूलेगा | सोना दोगना हो कर बढ़ता जाए जैसा 1+1 = 2, 2+2 = 4 वगैरा |

6) पिता को जन्म से ही तारता होगा | 12-24-48 साल आयु तक उच्च हालत कर देगा | नर संतान चाहे कम 3 तक होंगी मगर उत्तम हालत की होंगी |

7) चंद्र नेक हो तो माता खानदान को तारता होगा |

8) गुरु या राहु उत्तम या नंबर 2 उत्तम हो तो पिता खानदान को तारेगा (मंत्री समान हो)

मंदी हालत में

1) मामा की जड़ काट देगा और उनका खाना ख़राब करेगा |

2) शत्रु ग्रह नंबर 3 में हो (चंद्र या मंगल) तो नर संतान मरती जाए |

3) जब शुक्र मंदा हो तो चोर-डाकू फिर भी मंदा हाल होगा | 

S Kuber RA
Jyotish Acharaya
Vedic & Lal Kitab Astrologer

Lal Kitab Vastu Consultant

Sunday, 4 November 2018

लाल किताब केतु खाना नंबर 8

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 8  


बच्चो की मोहब्बत के गम में छत पर रोने वाला कुत्ता | मौत के यम को पहले ही देख लेने वाला कुत्ता

मरे बच्चे इतने, कब्र भर रही है |
गिला मर चूको का तू क्या कर रही है |

गुरु मंदा तो केतु मंदा, भला न मंगल रहता हो |
मारक घर जब केतु बैठा, पत्थर हो पिस्तान (स्त्री के वक्ष स्थल) |   

नेक हालत में

1) केतु के अच्छे बुरे होने का फैसला सदा खाना नंबर 12 से होगा | जब तक बुध मंदा न हो, केतु मंदा न होगा |

2) संतान जल्द कायम हो या देर से मगर अपनी आयु सदा लम्बी, 70 वर्ष से कम नहीं, चाहे अधिक हो |

3) यह घर ग्रह चाली कुत्ते केतु के कानो की जगह है इसलिए मौत के यम के आने की आहट जल्द सुन लेता होगा यानि उसे मौत आने का पहले पता लग जाता होगा |

4) 34 साल आयु में नर संतान कायम होगी | 34 साल से पहले की नर संतान और 34 साल बाद पैदा हुई नर संतान दोनों एक साथ शायद ही जीवित होगी | जन्म कुंडली में बुध अगर खाना नंबर 1 से 6 में बैठा हो तो नर संतान, 34 साल तक की पैदा हुई, आखिर तक कायम रहेगी | बुध अगर 7 से 12 में हो तो 34 वर्ष की उम्र के बाद की संतान आखिर तक कायम रहेगी | कई बार 45-48 साल आयु तक कोई नर संतान न हो या एक संतान कायम हो और बाद में दूसरा लड़का कायम होगा |

बुध किस खाना में बैठा हो तो संतान किस साल होगी

बुध नंबर 1 में हो तो 29 साल में
बुध नंबर 2 में हो तो 30 साल में
बुध नंबर 3 में हो तो 31 साल में | जैसे जैसे खाना नंबर आगे बढ़ता जाए, एक-एक उम्र का साल आगे बढ़ाते जाए बुध नंबर 12 में बैठा हो तो 40 साल में |

खाना नंबर 6 केतु का अपना घर भी है और वहाँ केतु नीच भी है | इसलिए बुध अगर नंबर 6 में हो तो 34 साल से पहले और बाद की दोनों संतान कायम रह सकती है |

स्वयं अपनी बहन या लड़की की शादी के बाद, जो भी पहले हो, नर संतान कायम होगी |

5) जब मंगल नेक हो और गुरु नंबर 2-1 में हो या चंद्र नंबर 2 में हो तो अब केतु कायम गिना जाएगा | किसी भी उपाय की जरूरत न होगी | संतान की वर्षा होगी | यदि चंद्र मंदा हो तो चंद्र पूजन सहायक होगा |

6) गुरु और मंगल 6 -12 में न हो तो केतु का प्रभाव कभी मंदा न होगा |

7) शुक्र और बुध अगर कुंडली में उत्तम हो तो केतु का फल मंदा न होगा |

मंदी हालत में

1) केतु नंबर 8 के समय अगर बुध-शुक्र मंदे घरों में हो तो उसका चाल-चलन उसकी स्त्री के स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा | यानि स्त्री के स्वास्थ्य के लिए केतु की पूजना और चाल-चलन ठीक रखना जरूरी होगा |

2) बच्चो के गम, उदासी से भरा हुआ, छत पर लेट कर रोने वाला कुत्ता होगा | नर संतान कब्र में भरती जाए | मंदे समय की पहली निशानी कुत्ते का छत पर बैठ कर रोना होगा | संतान कायम होने का समय 34 साल की आयु की हदबंदी होगी | 48 साल आयु तक संतान का सुख हल्का होगा | केतु की बीमारी, पेशाब की नाली से कतरा-कतरा निकलना, महीनो तक |

3) 25 साल आयु तक केतु का प्रभाव अच्छा होगा मगर 26 वे साल से राहु और केतु के साथ-साथ बुध-शनि भी मंदे होंगे | पुरुष-स्त्री दोनों गृहस्थ जीवन में कोई खास सुखी न होंगे |

4) केतु की चीजे (जैसे दो रंगा काला सफ़ेद कम्बल और पूरा कम्बल) धर्म स्थान में देना सहायक होगा | जब कोई ग्रह साथ या साथी हो तो दोरंगे कम्बल का टुकड़ा लेकर, दूसरे साथ-साथी ग्रह की चीज बाँध कर वीराने में दबाना सहायक होगा |

5) खाना नंबर 2 अगर खाली हो तो (यहाँ राहु को नहीं गिनते) संतान की मंदी हालत से बचने के लिए गुरु का उपाय सहायक होगा | कान छेदन करके उसमे सोना डालना सहायक होगा | कम से कम 96 घंटे तक कान का सुराख़ कायम रखना होगा | केतु की बीमारी, जुलाब, दर्द, फोड़े, कोढ़, जख्म आदि सेहत की खराबी का बहाना होंगे |

6)  कोई भी ग्रह केतु के साथ नंबर 8 में हो तो केतु स्वयं मंदा गिना जाएगा | भाग्य का हाल दो-रंगा होगा | केतु अपना फल नंबर 2 का दिया मंदा फल देगा |

7) गुरु या मंगल कोई नंबर 6 / 12 में हो या मंगल बद 4 में हो तो संतान, धन दोनों मंदे बल्कि मंगल, केतु दोनों का फल मंदा होगा |
 
8) शनि या मंगल नंबर में 7 में हो तो केतु की सब चीजे मंदी और चारपाई तक मंदी | दुःख होगा | छत मकान से  गिर जाए | गृहस्थ, घर-बार, रहने का मकान और उसका तो खाना ही बर्बाद होगा |

9) मंगल नंबर 12 और शनि नंबर 1 में हो तो ऐसे टेवे वाले के जन्म से अमूमन 12 मॉस पहले भाई की मौत होगी     
S Kuber RA
Jyotish Acharaya
Vedic & Lal Kitab Astrologer

Lal Kitab Vastu Consultant

लाल किताब केतु खाना नंबर 7

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 7 


गडरिये (चरवाहा, पशु चराने वाला) का पालतू कुत्ता, शेर का मुकाबला करने वाला कुत्ता

सब कुछ के होते जो रोता रहेगा |
तो यह नस्ल तेरी को जाहिर करेगा |

नेक हालत में

1) आम तौर पर जिस तरह स्त्री के भाई-बहन उसी तरह टेवे वाले के बच्चे होंगे | 24 साल की आयु में 40 साल गुजारे की धन-दौलत आ जाएगी | धन दौलत की बरकत लड़के की आयु के हिसाब से एक फॉर्मूला का इस्तेमाल करके देखेंगे

लड़के की आयु के साल को 48 से भाग दे (डिवाइड करे) और 8 से गुणा कर दे यानि

लड़के की आयु / 48 x 8 = धन की बरकत

मसलन लड़के की आयु हो 24 साल तो

24 / 48 x 8 = 4 यानि 4 गुना यानि लड़के के जन्म दिन के समय जो धन की बरकत थी वो लड़के के 24 साल आयु में चार गुना हो जाएगी | ज्यों-ज्यों लड़के की आयु बढ़ेगी धन जमा होता जाएगा और बढ़ता जाएगा | यह असर 48 वर्ष तक चलेगा यानि लड़के की 48 वर्ष की आयु में 8 गुना बरकत हो जाएगी | उसके बाद हालात सामान्य हो जाएँगे |

ऊपर लिखा है कि 24 साल आयु में 40 साल गुजारे की धन दौलत आ जाएगी | इसके लिए नीचे लिखा फॉर्मूला है

लड़के की उम्र / 48 x 80 = इतने साल गुजारे की धन दौलत आ जाए

24 / 48 x 80 = 40 साल गुजारे की धन दौलत आ जाए | 

2)केतु अब गली का शेर बहादुर, बच्चो का साथी, उनमे प्यार और शेर से टकराने की हिम्मत रखने वाला गडरिये का पालतू कुत्ता होगा जो शत्रुओं को कुत्ते की मार भगाएगा |

3) जब बुध, शुक्र, गुरु की सहायता हो तो रिजक देने वाली हवाई चक्की मदद पर चलती होगी | शुक्र, शनि कभी मंदा न होगा | शत्रु ग्रह चंद्र / मंगल में से कोई मंदा हो तो वो स्वयं ही बर्बाद होगा | जुबान का पक्का और वायदा निभाने वाला होगा | जीवन में कभी निराश न होगा | सभी कुछ के होते हुए अगर दुसरो के सामने अपने रोने रोए तो वह उसकी अपनी और जद्दी नस्ल के खून के असर को जाहिर करेगा |

मंदी हालत में

1) सामने घर का हाल केतु की चीजों पर मंदा होगा | यानि खाना नंबर 1 में बैठे ग्रह से सम्बंधित |

2) टेवे वाला अपनी खुदी और तकब्बुर से बर्बाद होगा, नहीं तो नहीं होगा |

3) अगर केतु मंदा हो तो जिस दिन खाना नंबर 1 में आए या जब लड़का बालिग़ हो जाए तो उम्दा होगा |

7-19-31-43-55-67-74-95-103-115 (इंटरनेट वाली किताब में मिसप्रिंट है)

4) मंदी जुबान, झूठा वायदा जहमत, बीमारी देगा | शुक्र गृहस्थी आग में जलता और पत्थर गिराने वाला तूफ़ान चलता होगा |

5) बुध मंदा हो तो महमूद (उत्तम, प्रशंसनीय ) फिरदोसी (स्वर्ग में रहने वाला) को अशर्फियों का वायदा दोबारा याद न होगा | महमूद टेवे वाला रोता, मायूस कब्र को जाता होगा और उसका कफ़न तक बदबू से भरा होगा |   

6) बुध नंबर 7 में हो तो सब्ज कदम (मनहूस) , अहले कलम होगा (लेखक) | बुध की 34 साल आयु के बाद तारेगा | और जो शत्रुता करे वो स्वयं बर्बाद होगा | 34 साल आयु तक शत्रु अवश्य गले लगे रहेंगे मगर 34 के बाद कुत्ते की तरह मार देगा | |

S Kuber RA
Jyotish Acharaya
Vedic & Lal Kitab Astrologer

Lal Kitab Vastu Consultant

लाल किताब केतु खाना नंबर 6


लाल किताब 

केतु खाना नंबर 6 


शेर कद खूँखार कुत्ता, दो रंगी दुनियाँ |

हजम घी अगर कुत्ता दुनिया में करता |
छुपे फिरता हर घर में, बुजदिल न डरता |

1) इस ग्रह की सही हालत मनुष्य में पाँव से मिलेगी | पाँव में सब कुछ हाथ की तरह गिना है | पाँव सदा जमीन पर लगता है | जमीन को शुक्र माना है खासकर मिटटी की जमीन को | शुक का बुर्ज अँगूठे पर होता है इसलिए पाँव की सिर्फ एक रेखा, ऐड़ी से निकल कर अँगूठे तक चली जाए तो सवारी का सुख होगा |



 2) पाँव की उँगलियों को छोड़ कर बाकी पाँव पर, दाएँ पाँव पर अगर दिव्य निशान हो जैसे शँख, चक्र, सिद्फ (सीपी) वगैरा तो यह ग्रह के कायम होने का नेक प्रभाव होगा | मगर बाएँ पाँव पर नीच होने का प्रभाव देंगे |

3) अगर बायाँ पाँव दाएँ से बड़ा हो तो  कम हौसला, डरपोक होगा | पाँव का अँगूठा छोटा हो तो केतु नीच या मंदा होगा | ऐसा व्यक्ति एक जगह न रह सकेगा |

पाँव की उँगलियाँ और उनका फल

4) अँगूठा तर्जनी बाहम मिले हो तो मंद भाग यानि दोनों आपस में जुड़े से हो | 


5) अँगूठा छोटा हो तो एक जगह न रह सके


6) अँगूठा छोटा, तर्जनी बड़ी हो तो पहले लड़के या लड़की का सुख नहीं होगा |


7) अँगूठा और तर्जनी बराबर हो तो प्रसन्नता से रहने वाला, समृद्ध



8) अँगूठा बड़ा और तर्जनी छोटी तो दुसरो का गुलाम रहे |


9) तर्जनी मध्यमा से बड़ी तो औरत गरीब घर की तथा उससे दुःख मिले |



10) तर्जनी मध्यमा से छोटी तो औरत का पूरा सुख |



11) तर्जनी मध्यमा से बहुत छोटी तो स्त्री सुख हल्का


12) अनामिका मध्यमा से छोटी तो स्त्री सुख हल्का |


13) कनिष्ठिका अनामिका से बड़ी तो नेक भाग्य


14) कनिष्टिका अनामिका से बहुत बड़ी हो तो मंदा भाग्य |





15) कनिष्टिका अनामिका से हद से ज्यादा बड़ी हो तो जलील होगा |


16) कनिष्टिका अनामिका से छोटी हो तो शुभ होगा |


17) कनिष्टिका अनामिका के बराबर हो तो संतान का सुख मगर आयु कम होगी |


18) पांचो उँगलियाँ बराबर या दराज लम्बी तो हुक्मरान होगा |


19) पांचो एक दूसरे से क्रम से बड़ी होती जाए तो साहिबे संतान होगा



पाँव की उँगलियों के नाखून

20) सुर्ख ताम्बे रंग के तो राजा या हुक्मरान हो |
21) नीले रंग के तो आला (उम्दा) मरतबा (पदवी)
22) जर्द रंग के हो तो दीवान साहिब
23) स्याह (काले) रंग के हो तो चोर, डाकू फिर भी मंदा |

नेक हालत में

1) जैसा गुरु टेवे में हो वैसा ही केतु का हाल होगा |

2) केतु से लड़का, कुत्ता, गधा, सूअर भी माना है | ऐसे पुरुष की संतान यदि इन पशुओं की तरह नालायक भी हो जाए तो जिस तरह एक मामूली कुत्ता, शेर की खाल पहन कर अपने मालिक की सहायता कर सकता है, उसी तरह वह संतान अपने पिता (टेवे वाले) की सहायता अवश्य करेगी | जिस तरह केतु नंबर 1 ने सूर्य को सहायता दी चाहे सूर्य टेवे में कैसा भी बैठा हो उसी तरह नंबर 6 का केतु, गुरु को कभी मंदा न होने देगा | चाहे गुरु कहीं भी और कैसा भी बैठा हो |

3) शनि का प्रभाव भी भला ही होगा | अपनी संतान और दूसरे सलाहकार ठीक सलाह देंगे | इस घर में ग्रह चाली  कुत्ते (केतु) की दुम टेढ़ी मानी गयी है | शत्रु दबे रहेंगे | धन पर धन आएगा |

4) अकेला ही बैठा हुआ हर तरह से उत्तम फल देगा | और मामूली कुत्ता भी शेर की खाल पहन कर अपने गुरु (पिता) की मदद करेगा | ऐसा पुरुष स्वयं के लिए अच्छा मगर दुसरो के लिए बुरा असर देगा |

5) शेर के कद का लड़ाका कुत्ता, दो रंगा सांसारिक भाग्य (नीच भी और अपने घर का भी) | स्वयं सुखिया होगा |

6) जीवन बढ़ने की इच्छा, हमला रोकने की शक्ति, बदला लेने की शक्ति, स्वाद का शौक, जखीरा जमा करने की आदत और राजदरबार का साथ होगा |

7) बुध नंबर 6 में हो तो दोनों का फल नेक होगा |

8) गुरु उम्दा हो तो संतान से बढ़ता होगा | मामूली चूहा (केतु) भी जाल काट कर सहायता दे |

9) शुक्र कायम या उत्तम हो तो शुक्र आपत्ति दूर करता होगा |

10) जब गुरु / मंगल 6 में न हो और न ही 12 में गुरु / मंगल / बुध हो तो केतु अपनी नेकी में बढ़ता और उत्तम फल देता होगा, जब तक ऐसा आदमी तकब्बुर (घमंड) और खुदी से खुद ही न मरे |

11) गुरु नेक हो या नंबर 2 से दृष्टि भली हो तो आयु लम्बी 70 वर्ष | मामू खानदान को सुख और देश-परदेश के जीवन में आराम हो |

मंदी हालत में

1) केतु अमूमन बुध का शत्रु और शुक्र का मित्र होता है | लकिन इस घर में केतु की चाल उलटी होगी | अब केतु बुध का मित्र और शुक्र का शत्रु होगा |

2) कुत्ता क्या जाने हलवे का स्वाद या कुत्ते को घी हजम नहीं होता के आधार पर ऐसा व्यक्ति बेकदर, हर जगह पाँव की ठोकर से लड़खड़ाते, पत्थर नाचीज टुकड़ा की तरह होगा | मामा तथा मामा खानदान पर भी मंदा हो सकता है |

3) केतु जब नंबर 2 की दृष्टि से बर्बाद हो रहा हो तो केतु खाना नंबर 6 की चीजों, काम सम्बन्धियों का फल बर्बाद और मंदा करता होगा | बाएँ हाथ पर सोने की अंगूठी सहायक होगी |

4) मंदी हालत में होशियारी, ख़ुदपसन्दी और खुद्दारी का साथ होगा |

5) गुरु मंदा हो तो सफर बेमतलब और शत्रु बिन बुलाए खड़े होंगे |

6) चंद्र नंबर 2 में हो तो मामा और माता का हाल अच्छा न होगा | बुढ़ापा हल्का होगा | मगर केतु अब केतु की दूसरी चीजों या संतान पर मंदा न होगा |

7) कोई भी ग्रह सिवाय बुध के नंबर 6 में हो तो केतु हर तरफ से मंदा तूफ़ान पैदा करता होगा | अपना ही कुत्ता काट खाए | पाँव की खराबियाँ शुक्र के मंदे होने की निशानी होगी | और विचारों पर बुरा प्रभाव गुरु के मंदे होने की निशानी होगी |

8) शुक्र नंबर 6 में हो तो दोनों मंदे होंगे |

S Kuber RA
Jyotish Acharaya
Vedic & Lal Kitab Astrologer

Lal Kitab Vastu Consultant

Saturday, 3 November 2018

लाल किताब केतु खाना नंबर 5

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 5 


अपनी रोटी के टुकड़े के लिए गुरु का निगरान

हुए नेक थे जब जवानी के चढ़ते |
मिले पोते इतने न थे जितने लड़के |

नेक हालत में

1) उठती जवानी के समय नेक होवे तो पोतो की संख्या अपने लड़को से अधिक होगी | केतु का फल अपने लिए उत्तम होगा | लड़को की हालत, आयु गुरु पर होगी | 24 साल की आयु तक रोटी के लिए गुरु का निगरान होगा | बाद में स्वयं उत्तम होगा और गुरु की शर्त न होगी या हट जाएगी |

2) गुरु, सूर्य या चंद्र 4-6-12 में हो तो नर संतान पांच से कम न होगी | 

3) जब शनि नंबर 9, शुक्र नंबर 4 में हो तो पूरी मच्छ रेखा (माली) कायम होगी | अब शनि संतान के सम्बन्ध में कोई मंदा प्रभाव न देगा | न ही दो स्त्रियों का झगड़ा होगा यानि शुक्र नंबर 4 की दो स्त्रियों की शर्त न होगी | संतान की सँख्या एक ही स्त्री से 9 लड़के और 3 लड़कियां होंगी |

मंदी हालत में

1) जब गुरु मंदा हो तो टेवे वाला स्वयं तो बहुत सुंदर था मगर पता नहीं वो सुंदरता जवानी में कहाँ गयी | संतान के लिए मंदा और लड़को को साँस (दमा) की बीमारी और 45 साल तक केतु का मंदा हाल होगा | बेशक लड़के कितने भी पैदा हुए हो मगर जीवित शायद ही होगा | घर में कुत्ते के रोने की आवाज आए |

2) जब टेवे में पितृ ऋण हो तो केतु का गृहस्थी प्रभाव मंदा ही होगा | चाहे केवल दो ही लड़के जीवित हो मगर वो पूरी तरह से सुखिया और सुख देने वाले होंगे |

3) चंद्र या मंगल 3-4 में हो तो केतु का प्रभाव मंदा होगा | टेवे वाला गरीब होगा | उसके पशु बीमार होंगे | मंदी हालत होगी | चंद्र / मंगल की चीजों का दान उत्तम होगा | जैसा धर्म ईमान, वैसी ही संतान की हालत होगी |

4) शनि 5-9 में हो तो तीन लड़के नष्ट होने पर 36 साला आयु तक फिर तीन अवश्य कायम होंगे खासकर जब च्नद्र / मंगल भी 3-4 में हो |    

S Kuber RA
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लाल किताब केतु खाना नंबर 4

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 4 


बच्चो को डराने वाला कुत्ता, ज्वारभाटा, समुन्द्र (खाना नंबर 4 चंद्र का) में तूफ़ान (केतु)

सफर अपने का फल चाहे मीठा मिलेगा |
मगर बोझ देरी का उसको सहना पड़ेगा |

नेक हालत में

1) बाप के लिए उत्तम फल बल्कि गुरु पिता की शक्ति उत्तम उच्च तथा नेक करता होगा |

2) अपनी संतान के लिए सब्र करना पड़ेगा | संतान देर से और कुल पुरोहित के आशीर्वाद से होगी जब गुरु जन्म कुंडली में या वर्षफल में उच्च हो जाए | ऐसी संतान लम्बी आयु की होगी चाहे माता तथा धन के लिए वह एक तूफ़ान होगा | चंद्र की चीजों का मंदा फल होगा | स्वयं धनवान, मेहनती होगा | अपने किए हुए कर्मो का परिणाम ईश्वर पर छोड़ने वाला होगा |

3) गुरु के उपाय से धन और संतान बढे | मंदिर में सोना दान करना या कुलपुरोहित को पीले रंग की चीजे देकर चरण छू कर आशीर्वाद लेना उत्तम होगा |

4) जब चंद्र या मंगल 3-4 में हो तो कन्या अधिक होंगी | बुद्धिमान और उत्तम सलाह का स्वामी होगा | धन की कमी न होगी |

मंदी हालत में

1) बच्चो को डराने वाला कुत्ता | स्वयं का स्वास्थ्य मंदा होगा | पेशाब में शक़्कर का आना (मधुमेह, diabetes) होगी | माता और स्वयं की संतान पर मंदा प्रभाव होगा | समुन्द्र में तूफ़ान की भांति ज्वारभाटा यानि संतान में देरी करे यानि संतान 34 साल के बाद पैदा होगी और वो भी कुल पुरोहित के आशीर्वाद से |

2) चंद्र या मंगल 3-4 में हो तो केतु और चंद्र दोनों मंदे होंगे | न माता सुखी न संतान बढे | कुएं में गिरे कुत्ते की तरह नर संतान का हाल होगा | जो कुएं से बाहर न निकल सके |

3) पशुओ जैसे विचार और कम धन खासकर जब अंगूठे का नाखून वाला हिस्सा छोटा और मोटा हो |

S Kuber RA
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लाल किताब केतु खाना नंबर 3

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 3 

टूँ टूँ करते रहने वाला कुत्ता, मगर नेक दरवेश

बुझे प्यास न खून भाई का करते |
गले बाजू बांधेंगे तलवार कटते |

केतु घर जब तीजे आवे, भाइयों से वो तंग करावे |
औरत घर ससुराल हो मंदे, सालियाँ बेवा पड़ेंगी पल्ले |

नेक हालत में

1) चाहे अपने भाई, ससुराल का हाल रंग-बिरंगा (नेक व बद सोनो प्रकार का) मगर संतान अवश्य नेक होगी |

2) दूसरे साथी और मालिक की नेकी को परखने वाला यानि याद रखने वाला भला होगा | बदी को भुला देने वाला होगा | खुद-ब-खुद बिन बुलाए मदद के लिए हर समय हाजिर हो जाने वाला होगा |

3) मंगल नंबर 12 में हो तो 24 साल आयु से पहले लड़के के जन्म से मच्छ रेखा (माली हालत) का नेक असर होगा | तथा लम्बा सहायक आयु रेखा हर दो का नेक फल होगा खासकर जब उस समय कोई न कोई सफ़ेद बाल वाला बूढ़ा बुजुर्ग (गुरु) साथ या मदद पर हो |

मंदी हालत में

1) अपना दिमाग लगाए बिना ही दूसरों की हाँ में हाँ मिलकर दुखी होगा |

2) बिना कारण टूँ टूँ करते रहने वाले कुत्ते के स्वाभाव वाला मगर अंदर से नेक दरवेश होगा | अमूमन भाइयों से तंग या दुखिया होगा | प्रदेश के जीवन में मारा फिरे | केतु अब आयु और धन को हीले (छल, धोखा) बहाने बनाकर बर्बाद करता जाएगा और हर समय मंदा ग्रहण देगा | बुध, शुक्र और खेती का फल कोई ऐसा उत्तम न होगा | अपने भाई, बंधू ससुराल दुखिया होंगे | जंगल में भी सुख न मिले |

3) दीवानी मुकदमो में लम्बी-लम्बी चाले करके धन बर्बाद करेगा | स्त्री और साथियों से बिना कारण जुदाई का बहाना बन जाएगा |

4) ससुराल के कुत्ते के साथ से छोटा भाई दुखिया होगा | यानि जब टेवे वाला ससुर के घर में रहने लगे |

5) साथ का पड़ोस का मकान गिरा हुआ या कुत्तो के टट्टी करने की जगह की तरह बर्बाद होगा | ऐसे टेवे वाले के मकान में 3 लड़के, एक पोता या तीन पोते और एक लड़का अमूमन तौर पर रहते होंगे या उसके मकान में 3  खिड़कियाँ और 3 दरवाजे होंगे | और वो मंदे होने का सबूत देंगे |

6) दक्षिण के दरवाजे के साथ से संतान के विघ्न होंगे |

7) भाई के खून से प्यास बुझाना अपना ही बाजू काटना होगा |

8) संतान नालायक, निकम्मी होगी |

9) जब चंद्र / मंगल या दोनों नंबर 8 में हो, और दक्षिण के दरवाजे का साथ हो तो दक्षिण के दरवाजे के मकान में लगातार रहने से तीसरे साल से संतान (लड़के और लड़कियां हर दो) का मंदा हाल बल्कि उनकी मौते होनी भी शुरू हो जाएगी | और चंद्र या मंगल जो भी नंबर 8 में हो की मियाद तक मंदा प्रभाव चलेगा |

10) चंद्र या मंगल 3-4 में हो तो मुफ़लिस, गरीब होगा |

उपाय

1) फेफड़े या मंदी सेहत के समय गुरु की चीजे चलते पानी में बहाना या केसर का तिलक लगाना अच्छा होगा | माली हालत को ठीक करने के लिए और कान, रीढ़ की हड्डी, पाँव, घुटने, कमर आदि केतु से सम्बंधित चीजों में दर्द से राहत के लिए शरीर पर सोना उत्तम होगा | कान में सोना डालना उत्तम होगा |

2) मंदे सफर से बचने के लिए चलते पानी में सूर्य-चंद्र की मुश्तरका चीजे बहाना उत्तम होगा |

S Kuber RA
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लाल किताब केतु खाना नंबर 2

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 2 


आसूदा (समृद्ध, खुशहाल, आरामदायक, निश्चिंत, सुखी, तृप्त) हुक्मरान, मुसाफिर 

हुई पैदा औलाद हर घर जो तेरी |
बुढ़ापे में तुझे कौन देगा दिलेरी |

केतु दूजे गोबर गाय, ब्रह्म गुरु अस्थान हो | 
माता को बेशक न तारे, औरत का अभिमान हो |

तबदीली की शर्त जरूर होगी मगर तरक्की की शर्त नहीं |

नेक हालत में

1) हर नया सफर तबदीली पर हो, नई दिशा की ओर होगा | यदि पहले दक्षिण की और चले तो वापिस पश्चिम में ठहरे, फिर पूर्व में आए | चाहे भाग्य घूमता हुआ है मगर हाकिम मुसाफिर, सफर खुश्की का बहुत होगा और तरक्की देगा |

2) शुक्र भाग सदा उत्तम रहे चाहे शुक्र स्वयं कैसा भी बैठा हो | चंद्र का प्रभाव उत्तम होने की कोई शर्त नहीं |

3) चाहे चंद्र उच्च ग्रह के समान और बरसते पानी का स्वामी क्योँ न हो, राजदरबार में खिताब मिले, लाखो की आई-चलाई पर भी कलम चले मगर धन जमा न होगा | सिर्फ दलाली की तरह अपना हिस्सा लेता रहेगा | केतु अब शुक्र, गुरु की नकल या नकली सोने और रंग-बिरंगी रोटी की तरह किस्मत का दर्जा या जैसा गुरु हो वैसी ही हालत माया धन दौलत की होगी | जैसा शुक्र हो वैसा ही हाल, गृहस्थी गुजरान का होगा |

4) नंबर 8 खाली और केतु हर तरह से अकेला हो तो सफर और हुकूमत चाहे अधिक हो मगर हर तरह से उत्तम फल और हर और तरक्की हुक्मरान आसूदा | माथे पर तिलक कुदरती सहायता देगा या माथे पर तिलक की जगह केतु का निशान, त्रिपुण्ड शुभ होगा |

5) सूर्य नंबर 12 में हो तो 24 साल आयु केतु की मियाद के बाद खुद कमाई करने वाला और बारौनक जीवन होता चला जाएगा |


मंदी हालत में

1) हर घर में औलाद बनाए जाने से बुढ़ापे में कोई बच्चा सहायक न होगा |

2) राहु के अलावा नंबर 8 में कोई भी ग्रह खासकर केतु के शत्रु (चंद्र या मंगल) हो तो नंबर 8 वाले ग्रह से सम्बंधित प्रभाव के समय (जैसे गुरु हो तो 16, सूर्य तो 22 वगैरा) पर जहमत बल्कि अल्पायु ही लेंगे |     

S Kuber RA
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Friday, 2 November 2018

लाल किताब केतु खाना नंबर 1

लाल किताब 

केतु खाना नंबर 1 


हर समय बच्चे बनाने वाला, सारे शहर के बच्चो की फ़िक्र में गलता होगा

रिजक तेरा जब तुझको है आज मिलता |
लंगोटा फ़िक्र कल का क्यों तू ढीला करता |

नेक हालत में

1) चाहे सफर के लिए हुक्म और उसका फ़िक्र हर समय साथ लगा हुआ और तबदीली के लिए हर समय तैयारी होती होगी और बाकी सब हालात भी तैयार हो गए मगर आखिर में सफर न होगा |

2) राजा का चलन कौन रोके के नाम पर हर समय नए बच्चे बनाने वाला होगा | सारे शहर के बच्चो की फ़िक्र में मरता हो | दौलत और कामदेव की बेहयाई एक साथ बढ़ते होंगे | उसका आज का रिजक कोई रोक नहीं सकता इसलिए उसे कल का फ़िक्र न होगा, जिसके डर से बार-बार दम खुश्क होता रहे |

3) अब सूर्य का असर अच्छा होगा चाहे खाना नंबर 6 - 7 में हो या वैसे ही मंदा हो रहा हो | केतु जब कभी वर्षफल के हिसाब से नंबर 1 में आए, लड़का, दोहता, भांजा पैदा होने की निशानी होगी | केतु कैसा भी मंदा हो, गुरु का प्रभाव उत्तम ही होगा | दरवेश (फ़कीर) सेवा, दर्जा खुदाई और पिता (गुरु) के चरण धोता और पिता के मंदे समय में हर प्रकार की सहायता देगा |

4) मंगल नंबर 12 में हो तो केतु का नंबर 1 पर कभी मंदा प्रभाव न होगा |

5) सूर्य नंबर 6-7 में हो तो अब सूर्य नीच न होगा | मगर लड़को को बुध के समय (कच्ची शाम) और केतु के समय (सवेरे तड़के) सूर्य की चीजे जैसे गुड़ या बाजार में खाने-पीने  के लिए या खर्चने के लिए ताम्बे का पैसा देना विष के समान होगा |    

मंदी हालत में

1) केतु नंबर 1 में बैठा हुआ फर्जी फ़िक्र दिया करता है | नंबर 1 में बैठा चाहे नंबर 6-7 पर बुरा असर करे तो बेशक मगर सूर्य पर कभी बुरा असर न देगा | शादी के बाद, जब केतु मंदा हो, तो शनि जरूर सहायता देगा यानि शनि का उपाय सहायक होगा | वरना केतु ऐसा मंदा होगा कि गुरु (पिता) को भी काट खाए | पैदाइश जद्दी घर से बाहर (परदेश, सराय, मुसाफिरखाना, नानका घर आदि) होगा और जिस घर में जन्म होगा उस घर पर (जद्दी मकान में नहीं) मंदा तूफ़ान खड़ा हो जाएगा | पडोसी घर पर भी मिटटी उड़ती होगी |

2) मंदे समय की निशानी बुध से सम्बंधित वस्तुओं से शुरू होगी फिर शुक्र (खुराक, घर की चीजे) और फिर बाद में मंगल (खून मंदा या जहरी होकर) और आखिर में गुरु की हवा में भी मिटटी भर देगा जो इधर-उधर फर्जी चक्र में दौड़ने का बहाना होगी |

3) खाना नंबर 2-7 खाली हो तो बुध और शुक्र दोनों का मंदा हाल होगा |

4) सूर्य नंबर 7 में हो तो मंदी सेहत, खासकर जब दोहता / पोता पैदा हो |    

S Kuber RA
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लाल किताब केतु

लाल किताब 

केतु 


सफर की आँधी में, लड़के, पोते, नस्ल, कुटुम्भ और उसमे आगे आने वाले, दरवेश (फ़कीर), आकबत (मृत्यु के बाद की अवस्था, परलोक का भविष्य), अंदेश (दूरदर्शी, चिंता, ध्यान सूचक, सोचने वाला)

नजर पाँव तेरे जो उखड़े पड़ेंगे |  
सभी जेर रहते ही सिर पर चढ़ेंगे |

मिले केतु बुध कुत्ता दुनिया, पापी बुरा ही होता हो |
केतु मिला जब शनि-मंगल से, ऐसा बुरा नहीं होता हो, साथ मगर जब कोई तीसरा होवे, फल तीनो का मंदा है |  
केतु तख़्त से रवि हो उच्च, छठे मंगल तो केतु मरता हो |
कुत्तिया बच्चा जब एक ही होता, नस्ल कायम कर जाता हो |
गुरु मिले तो सबसे उत्तम, माता मिले खुद मंदा है |
बुध मिले खुद दुष्ट कहलावे, मदद शुक्र की करता है |
पहले घरों जो केतु होवे, गुरु मंदा ही जाता है, उल्ट अगर हो टेवे बैठे, भला चंद्र नहीं रहता है |
चंद्र अगर मंगल बद रोके, केतु मंगल बद करता है |
बुध-केतु दो बाहम लड़ते, बद मंगल भी डरता है |
राहु पाप गर ख़ुफ़िया होवे, केतु जाहिरा ही चलता है |
शारह-आम (आम रास्ता) में दोनों मिलते, मार दो तरफी करता है |
मकान गली का आखिरी होवे तो, औरत जात पर पड़ता है | हवा चलेगी भूत-प्रेती, बच्चो पे हमला करता है |


आम हालत 12 घर

केतु तख़्त पर पिसर (पुत्र संतान) हो मिलता, फर्जी फ़िक्र भी होता हो |
सफर, हुकूमत घर 2 उम्दा, उत्तम 6 वे जब अकेला हो |
रंग-बिरंगा हाल हो तीजे, ससुर, भाई खुद अपने जो |
गुम हालत 5 लड़के उसके, बेटा जल्द न चौथे हो |
6 बहादुर घर 7 बैठे, औलाद कब्र 8 भरता हो |
पिता नोवे घर अपने तारे, दसवे शनि पे चलता हो |
उम्र, नजर, न माली साथ, केतु पाया घर सातवे जो |
ऐश करे घर 12 इतनी, माया फ़ैली घर भरता हो |

केतु का दूसरे ग्रहों से सम्बन्ध

गुरु : उम्दा आसान, नेक आकबत (मृत्यु के बाद की अवस्था, परलोक)
सूर्य: तूफ़ान, स्वयं बर्बाद (केतु) मामा मंदे
चंद्र: कुत्ते का पसीना, दोनों मंदे
शुक्र : कामदेव की नाली (लिंग), शुक्र की जान, गाय का बछड़ा
मंगल : शेर के बराबर कुत्ता
बुध : कुत्ते की जान सिर में, एक अच्छा तो दूसरा बुरा
शनि : साँप के कान नदारद, केतु पर शनि का फैसला होगा
राहु : केतु का प्रभावव राहु के हाथ होगा या राहु की मर्जी पर होगा यानि

सुपुर्दम बतो माये  ख़्वेशरा   
तू दानी हिसाबे कमो बेशरा

अर्थार्त मेरा सब कुछ तेरे अपर्ण है और कमी बेशी के निर्णायक तुम (राहु) ही हो |

नेक  हालत में

 1) सांसारिक कामो को हल करने के लिए इधर-उधर सलाह करने के लिए दौड़-धूप का या 48 साला आयु समय केतु का समय होगा |

2) जर्द (गुरु) लाल (मंगल) अंडे का रंग (बुध) तीनो ग्रहो का केतु (तीन कुत्ते) होगा जो तीनो जमानो के मालिक होंगे | छलावा पापी जरूर है | जान से मारने के बजाए कब्र तक सहायता करेगा (चारपाई, तख्ता)

3) केतु (कुत्ते) के भाग

कान नंबर 8 का ग्रह लेते है | जैसे बुध नंबर 8 में तो बकरी जैसे कान | संतान (केतु) की आयु का फैसला मगर कम अक्ल की शर्त नहीं |

मुँह नंबर 2 का ग्रह जैसे मंगल नंबर 2 में तो शेर जैसा मुँह | असलियत नस्ल, सांसारिक रहन-सहन का हाल, माली हालत

दुम नंबर 6 का ग्रह | जैसे शनि नंबर 6 में तो साँप जैसी दुम | सदस्यों की गिनती, स्वभाव, अंदरूनी चाल, नब्ज या वह नाड़ी जो इसका भेद बता दे या जिसके द्वारा इलाज हो सके | खाना नंबर 10 के ग्रह से सम्बंधित जानवर विषैली पूँछ वाले होते है |

4) केतु नेकी का फरिश्ता, सफर का मालिक और आखिर तक सहायता देने वाला ग्रह है |

5) केतु, बुध दोनों मिल कर, कुत्ते का सिर (कुत्ते की जान सिर में) होगा | यानि जब तक बुध उम्दा या नंबर 2-6-8 उम्दा या नंबर 12 में उसके तीनो हिस्से गुरु, मंगल, बुध न हो | केतु नंबर 2 माली हालत, नंबर 8 औलाद की आयु, नंबर 6 मेंबरों की गिनती, भला ही होगा चाहे कैसा और कहीं भी बैठा हो |    

6) केतु से काला-सफ़ेद दोरंगा कुत्ता होगा मगर लाल रंग (सूर्य) के साथ होने से बुध होगा जिसमे चाल और प्रभाव तो बुध की होगी मगर मियाद केतु की होगी | अब नर कुत्ते की नस्ल की जगह मादा नस्ल लेंगे (कुत्तिया) और बुध की चीजे काम आदि पर पहले प्रभाव देगा |

7) कुत्तिया का नर बच्चा जो एक ही पैदा हुआ हो, खानदानी नस्ल कायम करेगा |

8) मंदे केतु के समय अपनी कमजोरी दूसरों से कहना या दूसरों के आगे रोने रोना कष्टदायी कर देगा | गुरु का उपाय सहायक होगा |

9) मंदी सेहत के समय चंद्र का उपाय करे | परन्तु जब लड़का मंदा हो तो धर्म स्थान में काला-सफ़ेद दो रंगा कम्बल दान करना शुभ होगा |

10) केतु के इलाज के लिए उसकी नब्ज या इलाज खाना नंबर 10 का ग्रह होगा | पाँव या पेशाब के कष्ट के समय रेशम का अति सफ़ेद (दूधिया रंग) धागा बांधना या चाँदी का छल्ला डालना (जो चंद्र की चीजे है) अति सहायक होगा | पाँव के अंगूठे में डाल सकते है | केतु को चारपाई भी माना है | ग्रह चाल में केतु को शुक्र फल (संतान) भी माना है इसलिए चारपाई असल में वो चारपाई है जो दहेज़ में मामा की तरफ से या लड़की के माता-पिता की तरफ से मिलती है | ऐसी चारपाई का संतान के जन्म समय (जन्म के सम्बन्ध में)प्रयोग लाना उत्तम होगा चाहे केतु टेवे में नीच, मंदा वगैरा ही क्यों न हो | जब तक इस चारपाई का प्रयोग घर में होता रहेगा, केतु मंदा प्रभाव न देगा 

मंदी हालत में

1) जब पापी ग्रह शनि-राहु, केतु को किसी भी तरह आ मिलते हो तो दुसरो पर प्रभाव के लिए बुरा ही होता है | मगर यह जान से नहीं मारता चाहे जिस जगह जन्म लिया हो वहाँ कुछ भी न रहे या रहने दे | दुनिया का धोखेबाज छलावा ही होगा |

2) जब तक बुध (केतु कुत्ते की असली दुम) अच्छा, केतु बुरा ही होगा |

3) धर्म स्थान में पाँव (केतु) पवित्र मानते है या धर्म स्थान के अंदर पैदा हुई संतान सदा जीवित रहेगी |

4) केतु का मकान बच्चो तथा स्त्री की हालत मंदी रखेगा | गुरु या सूर्य जब शत्रु ग्रहों से स्वयं ही बर्बाद हो रहे हो तो केतु मंदा बर्बाद ही होगा |   

5) केतु मंदे के समय खासकर जब चंद्र और शुक्र मिल रहे हो तो बच्चे का जिस्म सूखने लग जाया करता है | ऐसे समय में बच्चे के जिस्म पर दरिया, नदी या वैसे ही कोई मिटटी या गाचनी मल कर खुश्क होने दे | घंटे-आधे घण्टे के बाद बच्चे को मौसम के अनुसार ठन्डे या गर्म पानी से नहला दे | 40-43 दिन लगातार करने से शरीर का सूखना ठीक हो जाएगा |

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