लाल किताब
बृहस्पति + राहु
गुरु राहु के इकट्ठे होने पर टेवे वाले को चाहिए को वो तीन सांसारिक कुत्तो में से कोई एक कुत्ता न बने | नर औलाद की पैदाइश पर उत्तम होगा | पोते के जन्म पर ओर भी उम्दा हो जाएगा |
ऐसे प्राणी के पैदा होते ही ज़माने के गुरु और बृहस्पति के गृहस्थी शेर के साँस की हवा में, नीले आसमानी गुम्बद के मालिक राहु के हाथी की चिंघाड़ों का चाण्डाल धुआँ भरा तो किस्मत की कौस-ओ-कजाह (इंद्रधनुष) का रंग-बिरंगा नजारा अक्ल को चक्कर में डालता हुआ खाली आकाश में मुहीत (घेरे में, वृत में, encircled) में अपनी लहरों से इधर-उधर दौड़ने लगा |
गुरु का शेर, आसमानी कद्दावर हाथी की दौड़-धूप की उलझन की हवा से अपने रास्ते पर चलते हुए चाहे मर जाए, मिट जाए तो बेशक, पर हवाई साँस के चलते दम तक अपनी जाती कौल (कसम, स्वभाव) से हटता और मुकाबले की शिद्दत की वजह से कभी झुकता न होगा | उसके मुकाबले पर कड़कती हुई बिजली की ताकत की मदहोशी से भरपूर अपने जिस्म को चोट-दर-चोट से नीला करता हुआ शहजोर (अत्यंत बली) हाथी तमाम दुनिया के मुकर्रर किए हुए रास्ते पर कभी सीधा न चलेगा | और जर्द हवाई शेर दुनिया के कानूनी रास्ते पर सीधा चलने से न रुकेगा और आसमानी नीला हाथी हर एक सीधे रास्ते को अपनी टेढ़ी चालो पर नापने से बाज न आएगा | गुरु सीधा चले तो राहु हमेशा ही टेढ़ा जाए तो ऐसे दो मुसाफिरों का मुश्तरका रास्ता कब बराबर होगा | कभी किस्मत का जाफरानी (जिसमे केसर पड़ा हो, केसर के रंग का पीला) झलक, कभी निर्धनों के धुएँ की स्याह नीली शवाओ (भाग्य की किरणे) से टकराती हुई सोने को अपनी दौड़ती हुई लहरो से पीतल बना रही है | कभी वह कोढ़ से गले हुए, दम से उखड़े हुए, नीले जंग से मारे हुए मंदे पीतल के भाव बिकने वाले प्राणियों को बिजली की चमक की तरह दम-के-दम में लगभग जगमग करने वाले दमकते हुए कुंदन की तारा चमक दे रही है | संक्षेप में कहे तो ज़माने की दो रंगी चाल की ऊँच-नीच और लम्बी छोड़ी दुनिया किसी पैमाने में नहीं बनते |
इसका मतलब यह है जब गुरु हमेशा सीधे रास्ते पर चलने वाला ग्रह है | वह अपनी जिंदगी में कुछ पाने के लिए अपने आदर्शो से समझौता नहीं करता | मगर राहु का स्वाभाव बिलकुल उल्टा है | उसको जिंदगी में कुछ पाने के लिए कोई भी रास्ता, चाहे सही चाहे गलत हो कुछ फर्क नहीं पड़ता | यानी गुरु अगर सीधा चले तो राहु अपनी टेडी चालो से, धोखा फरेब से अपना उल्लू सीधा करने वाला होगा | राहु के साथ होने से गुरु का सोना पीतल होगा और वो भी जंग लगा होगा नीले रंग का (राहु) | यानि उसका कोई मोल न होगा | भाग्य की दोरंगी होगी यानी कभी धन-दौलत उम्दा तो कभी मुफलिसी (गरीबी) |
जन्म लिए हुए एक से 12 साल हो गए | दोनों ही ग्रहो ने कुंडली में 12 खानो में चक्कर लगाया (वर्षफल के हिसाब से) | शेर सीधे और हाथी टेड़े चलते चलाते दुनिया की 12 ही तरफों में घूम आए तो ऐसे प्राणी का जद्दी घर घाट एक किस्मत की हार में फसे हुए फ़कीर साधू के उजड़े हुए तकिये की तरह धुआँधार जमाना की मंदी हवा से भर गया | और मुसाफिरी का दिन या वह 12 साला चक्कर जिसमे वो सुबह से ही रवाना हुए थे शाम पर आ पहुँचा | ज़माने के गुरु और गृहस्थी साधु ने अपनी समाधी लगा दी यानि किस्मत का शेर निर्धनी की ऐसी जोर भारी नींद से सो गया कि हर तरफ सुनसान (निहायत ही मंदा जमाना) हो गया | शेर की नींद मशहूर है और साधु की समाधी भी किसी से भूली हुई नहीं है | अब न ही राहु का धुआँ हट रहा है और न साधू / शेर जागते है | यानि हर तरफ गरीबी और निर्धनी का अम्बार दर अम्बार भरता चला जा रहा है | मगर वो दोनों हाथी-धुआँ और साधू-शेर अपनी अपनी मस्ती में मशगूल है | और दुनिया के सब साथी, बन्दे उन दो सोये हुए ग्रह चाली शेर और हाथी के पाँव तले दबे चले आ रहे है | जब झगड़ा बहुत बढ़ गया और मंदी हालत की रात, अँधेरे की कोई कमी बाकी न रही तो किस्मत से खाली हो चुके आकाश में सूर्य का प्रकाश होने लगा या यूँ कहे की उम्र का 22 वा साल आ पहुँचा | और जाती किस्मत के सूर्य के निकलने का वक्त आ पहुँचा | हाथ-पाँव कुछ कमाने लगे | राज दरबार से सहायता होने लगी | बुध ने सूर्य के रथ के पहिये का काम दिया यानि बुध की उम्र 17 साल में नेक तरफ और काम करने की अक्ल कुछ पहले ही मिल चुकी थी | चंद्र की उम्र 24 साल में सूर्य के रथ को घोड़े (चंद्र) का साथ मिला यानि माया-दौलत का साथ मिला | इतने में शुक्र की उम्र 25 साल आई तो स्त्री का साथ मिला | अपने भाई-बंधू जो अपनी शेरी भूले बैठे थे, जिनका खून सो गया था, 28 साला उम्र में मंगल का शेर गुर्राने लगा | यानि वो सब साथी बन्दे मदद पर हो गए | माया दौलत की हिफाजत करने वाला इच्छादारी साँप या शनि के खजांची का बक्सा जो धन से खाली था और मुर्दा रूह पर लेटा हुआ था अब 36 साला उम्र में भैरो बली की तरह बुलंद हुआ | मकान बने, आँखों की बिनाई बढ़ती और हर एक को भय आने लगा | गृहस्थ परिवार माया दौलत में सुख की नींद से तरह-तरह के उत्तम ख्वाब आने लगे | अल-औलाद बढ़ने लगी और केतु की 48 साल उम्र का दौरा जोर पर हो गया | ज़माने के गुरु ने सुख सागर की हवा का साँस माना और गृहस्थी शेर की नींद खुली तो राहु के फैलाई हुई निर्धनी का मंदा धुआँ और चाण्डाल हाथी अपने ही सिर को टटोलने लगा तो मालूम हुआ कि उसके दो टुकड़े हो चुके थे | और केतु, गुरु गद्दी (आसान), अल-औलाद जो गुरु के नीचे था उसके भी स्याह और सफ़ेद दो रंग पाए गए | खुद गुरु ने भी अपनी हस्ती और खुदी से बेदार (सचेत, जागरूक) हो कर दो जहानो का दौरा किया या गुरु का दूसरा दौरा उम्र का 51 साल शुरू हुआ |
ऐसा प्राणी राजा के यहाँ जन्म लेकर फ़कीर और फ़कीर के घर पैदा हो कर राजा या ज़माने के उसकी दो रंगी जरूर होगी और उसका तमाम मंदा जमाना सिर्फ एक ख्वाब की तरह होगा जो लड़के के आते-आते ही (पैदा होते ही) सब दूर होगा |
दोनों मुश्तरका से मुराद मसनुई बुध होगा | गैबी ताकत या इबादत का मालिक न होगा खासकर जब यह दोनों ग्रह खाना नंबर 7 से 12 में बैठे हो |
गुरु दोनों जहान का मालिक होगा यानि टेवे वाले को दुनियावी और गैबी दोनों मदद मिले जब पहली तरफ यानि दोनों नंबर 1 से 6 में हो |
नेक हालत में
ऐसा शख्स आराम या हराम की रोजी का आदि होगा यानि अव्वल तो ऐसे शख्स को कोई सख्त मेहनत और मशक्क्त का काम करना ही न पड़े | लेकिन अगर किस्मत से घिरे-घिराय सख्त काम गले पड़ ही जाए तो ऐसा प्राणी कुछ करे-कराएगा नहीं | मुफ्त में ही अपने पेट की रोटी पा लेगा | ख़्वाह वह आराम की ख़्वाह हराम की गिनी जाए |
खाना नंबर 1
फय्याज (दरियादिल, दानी) सखी (उदार) हो तख़्त पे बैठा, फकीरा-राजा ख्वा कोई हो |
रिजक रोजी न हरदम मंदा, फसल कटी या बोई हो |
ख़्वाह धनाढ्य ख़्वाह निर्धन मगर फय्याज व सखी जरूर होगा | अपनी फसल ख़्वाह बोई हुए ख़्वाह कट चुकी हो उसको रिजक-रोजी की कमी न होगी | जन्म ख़्वाह चाण्डाल के घर में हो मगर उसके पेट भरने के लिए अनाज देने के लिए राजा खुद उसके दरवाजे पर खड़ा होगा |
खाना नंबर 2
चुप गुरु जो टेवे गिनते, खामोश राहु अब होता हो |
उपदेश पाएगा गुरु का अपने, सवारी हाथी गुरु माया हो |
नेकी के काम बहुत करे | गरीबो का मददगार | अब राहु टेवे वाले के गुरु पर बुरा असर न देगा यानि गुरु से सम्बंधित आशिया, रिश्तेदार, कारोबार वगैरा पर बुरा न होगा | बल्कि राहु का हाथी अब गुरु के साधु के हुक्म से चलेगा | अगर किसी वजह से टेवे वाला गरीब भी हो जाए तो भी हाथियों वाला गद्दी नशीन साधु होगा |
खाना नंबर 3
आँख की होशियारी ज्यादा होगी जो दुश्मन से बचाए | बहादुर होगा | राहु की पूरी उम्र (42-21-10-5) के बाद गुरु-राहु दोनों का खाना नंबर 3 का दिया फल जाहिर होगा | मंदी हालत में केतु का उपाय जो कि गुरु-राहु में (नीचे) लिखा है मददगार होगा |
खाना नंबर 4
उत्तम चंद्र के असर का पूरा फायदा होगा | मगर गुरु अपने असर के लिए चुप ही होगा | यानि जाहिरा तौर पर गुरु के उम्दा असर का कोई खास जोर न होगा | इसका मतलब यह नहीं है उच्च गुरु मंदा फल देगा |
खाना नंबर 5
हाकिम या सरदार होगा |
खाना नंबर 7
ससुर पिता से एक ही जिन्दा, वो भी दमे से दुखिया हो |
बुध मंदे से लेख हो जलता, तराजू शुक्र-बुध उलटी हो |
जवानी में खूब आराम पाए |
खाना नंबर 12
लेख दौलत न मंदे कोई, न ही आकबत (भविष्य) मन्दी हो |
कर्म-धर्म पर असर राहु से, गन्दी नाली वह निकलती हो |
दस्तीकार या पेशा हुनर से, नफा न हरगिज मिलता हो |
सुख मर्दो का हल्का गिनते, शनि असर भी मंदा हो |
अब दोनों मुश्तरका से (उनके मसनुई ग्रह) खाली बुध या खुले आकाश की तरह किस्मत का हाल होगा | राहु, गुरु का कोई झगड़ा न होगा | हुनरमंद, अक्लमंद मगर हुनर और पेशा दस्तकारी से कोई ऐसा नफा न होगा | | ऐसा नहीं कि नुक्सान होगा |
बाकी घर अपना अपना फल देंगे |
मंदी हालत में
सिवाय नंबर 2,12 के, बाकी घरों में 8 से 12 साल की उम्र में सोने का पीतल होगा ओर वो भी जंग लगा हुआ नीले रंग का | किस्मत के मैदान में जाहिरा साधु भी चोर का बर्ताव करेगा | कड़वा धुआँ और मंदे वाक्यात बल्कि 16 से 21 साल उम्र पिता का साँस बंद या आधा जिस्म नकारा हो जाए | 42 साल उम्र में सोने की चोरी या राहु या गुरु से सम्बंधित आशिया, कारोबार, रिश्तेदार का मंदा असर होगा |
मंदी हालत में गुरु-राहु मुश्तरका बुध का काम देंगे | पिता की उम्र और धन-दौलत के ताल्लुक में वही मंदा असर जो राहु नंबर 11 में गुरु के लिए लिखा है | खुद अपनी जाती आमदन की नाली के दो टुकड़े और वह भी बेमानी | गुरु (फ़कीर) की कुटिया में हाथी (राहु) घुस जाने की तरह मंदा हाल होगा | और वह भी ऐसे गद्दी नशीन साधू का जिसकी सवारी के लिए हर वक्त पहले हाथी मौजूद रहते थे | जन्म चाहे राजा का या फ़कीर का, जन्म पर ख़्वाह राजा ही क्यों न हो ख़्वाह फ़कीर हो, किस्मत दो रंग जरूर दिखलाएगी | यानि राजा से फ़कीर और फ़कीर से राजा | अमीरी के वक्त सवारी के हाथी (राहु) सिर झुका कर सलाम करते होंगे मगर गरीबी के धुएँ में फ़कीर हाथियों की लीद उठाते-उठाते सुख का साँस, रात की नींद ख्वाब में भी न ला सकेगा |
उपाय
मंदी हालत के वक्त केतु के उपाय से राहु का मंदा असर दूर होगा | जिस्म पर सोना मदद देगा | अगर केतु भी मंदा (लड़का नालायक) हो तो चंद्र की उपासना या माता की मार्फत चंद्र का उपाय मदद देगा | केतु की स्याह और सफ़ेद रंग के नगीना को अंगूठी को हर रोज गाय (शुक्र) के झूठे पानी से धोने के बाद मंगल की चीजों का दान करना जरूरी होगा | या फिर जौ अनाज को दूध से धोकर अपने पास रखकर हर रोज 43 दिन तक बहाते रहना सहायक होगा |
खाना नंबर 2
अगर खाना नंबर 8 में गुरु-राहु के दुश्मन ग्रह हो या वैसे ही मंदे ग्रह हो तो औलाद के विघ्न होंगे |
खाना नंबर 3
बुध और केतु दोनों ही का 34 साल तक मंदा फल होगा |
खाना नंबर 5
औलाद के ताल्लुक में राहु नंबर 5 का दिया असर होगा |
खाना नंबर 7
पिता और ससुर में से कोई एक ही जिन्दा होगा | और दोनों की जिन्दा हालत में हो सकता है एक को दमा या साँस की तकलीफ हो |
खाना नंबर 8
जिंदगी खानापूर्ति का नाम होगी | हर तरफ से बैउमींदी का मंदा धुआँ जोर से साँस बंद करने की कोशिश पर तुला हुआ होगा | गुरु नंबर 8 का दिया उपाय मददगार होगा |
S Kuber RA
Vedic & Lal Kitab Astrologer
Lal Kitab Vastu Consultant