लाल किताब अध्याय 2
प्रारम्भ
लाल किताब फरमाए यूँ, अक्ल लेख (भाग्य) से लड़ती क्योँ |
जबकि न गिला तदबीर (युक्ति, प्रयास, यत्न, कर्म पर भरोसा करना) अपनी, न ही खुद तहरीर (लेख) हो |
सबसे उत्तम लेख गैबी (ईश्वर का लिखा), माथे की तक़दीर हो |
फरमान नंबर 1
कुदरत से किस्मत किस तरह आई
1) हुक्म विधाता जन्म मिले तो लेख ज्योतिष बतलाता है
लाल किताब बच्चा ग्रह चाली, किस्मत साथ ले आता है |
2) इस बच्चे की नन्ही मुट्ठी में, पकड़ा देव आकाश का है
भरा खजाना जिसके अंदर, निधि सिद्धि की माला है |
3) नौ निधि को ग्रह 9 माना, सिद्धि 12 राशि है
9 में जब गुणा 12 करते, होती पूरी माला है (108)
जब बच्चा पैदा होता है तो उसकी मुट्ठी बंद होती है जिसे वह अमूमन बंद ही रखता है और आसानी से किसी दूसरे को अपने हाथ की हथेली नहीं देखने देता | बचपन में वह अपना कुदरती भेद छोटी सी बंद मुट्ठी में छुपाता है यानि अपना भाग्य किसी दूसरे को दिखाना नहीं चाहता |
ग्रह चाली बच्चा आसमान और पाताल से घिरे हुए आकाश में दोनों जहान (यह संसार और गैबी संसार) और दोनों अवस्था (जन्म और मृत्यु) की हवा (गुरु) को गाँठ लगा देने वाली चीज बच्चा ग्रह चाली कहलाई | यानि बच्चा पैदा होता है ईश्वर की दो हुई एक निश्चित किस्मत, भाग्य के साथ और पैदा होने के दिन से मृत्यु का समय भी निश्चित होता है |
12 राशियाँ और 9 ग्रह को गुणा करा या 27 नक्षत्र और उनके चार-चार चरण को गुणा करा तो आया 108 जो कि हमारा पूरा zodiac है इसीलिए पूजा करने वाली माला में 108 मनके होते है और एक सुमेरु माला जपने के लिए |
यही 108 सब के भाग्य की नीँव है |
सिर्फ खाली जगह (बुध) जिसका दूसरा नाम आकाश है और उसमे हवा (गुरु) भरपूर है |
फरमान नंबर 2
उसकी कुदरत का हुक्म नामा कहाँ पाया गया
अक्स (चित्र) गैबी जाहिर पहले सितारों पर हुआ
नक्श जिसका पीछे दिमागों आ हुआ
दिमागी खानो का असर तब हाथ की रेखा पर हुआ
चाँद सूरज फल की दुनिया से जहाँ दो बन गया
इल्म ज्योतिष इस तरह पर जब सितारों से हुआ
सीधी टेढ़ी हाथ रेखा से क्याफा (सामुन्द्रिक शास्त्र) चल पड़ा
दिमाग दाँया हाथ बायाँ पर चमक जब दे चुका
हुक्म नामा उसकी कुदरत मुट्ठी बंद इंसान था
पंचतत्व से बना यह शरीर और ब्रह्माण्ड है | भगवान श्री कृष्ण ने कहा है यत ब्रह्माण्डे तत पिण्डे यानि जो ब्रह्माण्ड में है वही पिण्ड अर्थार्त हमारे शरीर में है | पैदा होने के समय जो भी ग्रहों की स्तिथि ब्रह्माण्ड में होती है वैसी ही जातक के मस्तिष्क में स्थापित हो जाती है जिसे हम हाथ पर, या माथे पर या कुंडली वगैरा में देख सकते है | यानि जन्म के समय से ही हमारा प्रारब्ध निश्चित हो गया |
हाथ की उंगलिओं के नीचे के बुर्ज जितने उभरे हुए हो उतना ही नेक असर होगा |
दरअसल ईश्वर ने इंसान के साथ उसके लिए मुकर्रर (निश्चित) किए हुए कामों का हुक्मनामा उसकी हथेली पर लिख कर (अपने ही कब्जे में) इस ढंग से भेजा है कि वह कभी गुम न होने पाए और न ही उसमे कोई तबदीली या धोखधड़ी की जा सके मगर उसकी शक्की हालत को दुरुस्त कर के उसके शक का बेशक फायदा उठा लिया जाए | यानि जब किसी ग्रह का फल पुरे तौर पर पक्का न हो यानि शक्की हो तो उपाय के द्वारा उस ग्रह के फल को अपने अनुकूल किया जा सके |
फरमान नंबर 3
मर्द का दायाँ हाथ और जन्म लग्न कुंडली से तदबीर और बायाँ हाथ और चंद्र कुंडली से तक़दीर होती है | स्त्री के लिए उल्ट समझे |
तर्जनी ऊँगली गुरु की और कुंडली का खाना नंबर 2 | मध्यमा ऊँगली शनि की और खाना नंबर 11 | अनामिका ऊँगली सूर्य की और खाना नंबर 5 | कनिष्ठा ऊँगली बुध की और खाना नंबर 3 ? या खाना नंबर 6 ? दोनों नहीं है, खाना नंबर 8 है |
जन्म कुंडली के केंद्र के खाने यानि 1-4-7-10 को लाल किताब में बंद मुट्ठी के खाने कहते है |
12 वां घर आसमान है | छठा घर पाताल है | तीसरा घर तीनो ज़माने | कुंडली का केंद्र (centre) खाना नंबर 9 |
फरमान नंबर 4
समां करे नर क्या करे समय बड़ा बलवान, असर ग्रह का सब ही पर होगा, परिंदा पशु इंसान
बच्चा गैबी परदे से माता के पेट में आया | फिर गर्भ की बंद हवा से जब इस दुनिया में आया तो साँस लेते ही इस ज़माने की दोरंगी चालो के मैदान का लम्बा चौड़ा हिसाब किताब खुल गया या यूँ कहे कि जन्म वक्त का पता चलते ही इस जीवन का खाका या इस जीवन का भाग्य (जन्म कुंडली) ज्योतिष के अनुसार माना गया | जन्म वक्त को बुनियाद मानकर जिस तरह ज्योतिष इंसान के ताल्लुक में काम देता है यानि ग्रहों का जो प्रभाव हम इंसान पर मानते है वैसे ही ग्रहों का प्रभाव इस जहान पर (मुंडेन), परिंदे-पशु पर, मकान पर, या दूसरी दुनियावी सब ही चीजों पर भी होगा |
एक ही वक्त पर पैदा हुए दो बच्चे या एक ही लग्न में अलग अलग देश-शहर वगैरा में पैदा हुए बच्चो का भाग्य अलग हो सकता है | जन्म कुंडली के अनुसार मृत्यु का समय भी लगभग निश्चित | लेकिन किसी भूचाल, हादसे, जंग, महामारी आदि में एक साथ मरने वाले हजारो लाखो लोग का मौत का समय तो एक ही हुआ | यह सब देख कर ज्योतिष की बातों पर विश्वास जाता हुआ मालूम हुआ | ख्याल यह आया की जब सब की हस्त रेखा या कुंडली अलग थी तो हालत एक जैसे कैसे हुए ? फिर यह भी दिमाग में आया की 12 साल तक बच्चे की आयु का भरोसा नहीं और 18 साल के बाद हाथ की बड़ी रेखाओं में बदलाव नहीं | तो अब यकीन किस पर करे ? आखिर में दोनों इल्मों (हस्त रेखा और जन्म कुंडली ) को इक्कठा किया तो मालूम पड़ा कि बुनियादी असुलो के बगैर कोई मतलब हल न होगा | यह भी अहसास रहा की एक ही वक्त में या एक ही लग्न में पैदा हुए बच्चो के हालत अमूमन एक से न होंगे |
वैदिक ज्योतिष के अनुसार हमें यह पता है कि देश-काल-पात्र का बहुत महत्त्व है | व्यक्ति किस देश-शहर-स्थान, किस माँ बाप के घर, किस खानदान आदि में पैदा हुआ उसका भी प्रभाव पड़ता है | एक ही परिवार के लोगो की जन्म कुंडली एक दूसरे पर भी प्रभाव डालती है खासकर घर के मुखिया की | जिस शहर, स्टेट आदि में आप रहते है उस के मुखिया की कुंडली, देश के प्रधान मंत्री की कुंडली, अपने देश की कुंडली आदि सब ही का प्रभाव होता है जो मुंडेन इवेंट्स के लिए भी जिम्मेदार है | देश के प्रधानमंत्री की सप्तमेश की दशा में जंग तो अक्सर होती ही है | भारत की जन्म कुंडली का 2-8 राशि और 4-10 राशि का एक्सिस में पाप ग्रहों का गोचर तो जग जाहिर है |
S Kuber RA
Vedic & Lal Kitab Astrologer
Lal KItab Vastu Consultant
लाल किताब अध्याय 2